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Monday, 16 January 2017

Create a Blog

जैसे की मैंने आपको बताया है कि अपनी इस साईट के द्वारा मैं आपको स्टेप बाय स्टेप सभी जानकारी दूंगा जिनका इस्तेमाल करके आप अपने बिजनेस में चार चाँद लगा सकते हो और इस इन्टरनेट की दुनिया में छा सकते हो.
जेसा की आप सभी जानते हो आज के टाइम में इन्टरनेट का बोलबाला है जिसे देखो हर कोई इन्टरनेट पर अपना बिजनेस जमाने में लगा है आप लोग भी अपना बिजनेस on line कर सकते हो आप चाहो तो अपना खुद का एक ब्लॉग बना कर आपनी सर्विस उन करोड़ो लोगो तक पंहुचा सकते हो जो हर छोटी बड़ी चीजे पाने के लिए गूगल पर सर्च करते है आप के ब्लॉग के माध्यम से इन्टरनेट पर जुड़ सकते हो.
आज की पोस्ट के द्वारा में आपको बताऊंगा Create a Blog step by step हिंदी में ब्लॉग बनाने से पहले आपको अपनी पूरी प्लानिंग करनी होगी की आप किस तरह का ब्लॉग बनाना चाहते है ब्लॉग पर किस तरह की सर्विस देना चाहते है. जेसा की मेरा ब्लॉग है  जिस पर में कंप्यूटर से जुडी जानकारी लोगो को देता हु जब मैंने ये ब्लॉग बनाया था तब मेरे मन में बस यह ही विचार था की जितना मुझे ज्ञान है वो सब जानकारी ब्लॉग बना कर अपने ब्लॉग पर सेव कर देता हु ताकि अगर किसी को कंप्यूटर से जुडी जानकारी चाहिए हो तो वो सीधे मेरे ब्लॉग पर आकर जानकारी हासिल कर सके.
ब्लॉग बनाने से पहले आपको किस तरह का ब्लॉग बनाना चाहते है उसके बारे में जरुर सोचे और कोई ऐसा यूनिक नाम अपने ब्लॉग का रखे ताकि आपके ब्लॉग पर आने वाले हर विजिटर को आपके ब्लॉग का टाइटल भी पसंद आये और आपके ब्लॉग पर दी गयी जानकरी भी पसंद आये अगर आपके ब्लॉग पर आने वाले विजिटर को आपका ब्लॉग पसंद आया तो वो आपके ब्लॉग के बारे में और लोगो को भी बताएगा तो आप अपना ब्लॉग बनाने से पहले उसके टाइटल उसके नाम को बहुत ही सोच माझ कर रखे नाम सलेक्ट करने में किसी तरह की कोई जल्दबाजी ना करे सोच समझ कर ब्लॉग बनाओगे तो आपको अपने ब्लॉग पर सफलता जरुर मिलेगी.
तो आइये शुरू करते है Create a Blog स्टेप बाय स्टेप
ब्लॉग बनाने के लिए सबसे पहले आप अपनी जीमेल आईडी को लॉग इन करे उसके बाद ऊपर एड्र्स बार में blogger लिख कर Ctrl के साथ Enter का बटन दबा दे या फिर आप यहाँ क्लीक करके भी ब्लॉगर पर जा सकते हो.
Create a Blog
Create a Blog
ब्लॉगर पर जाने के बाद आपके सामने एक मेसेज आएगा जेसा आपको उपर चित्र में दिखाई दे रहा है इस मेसेज में आपको continue to blogger पर क्लीक करना है.
new blog
new blog
इसके बाद आपको चित्र के अनुसार new blog पर क्लीक करना है.
Create blog
Create blog
अब आपके सामने एक और विंडो खुलेगी जिसमे आपको सबसे पहले अपने ब्लॉग का टाइटल डालना है इसके बाद आपको वो एड्र्स डालना है जो आपको अपने ब्लॉग का रखना है Address डालने के बाद आपको निचे Template का ओप्संस दिखाई देगा इस ओप्संस में आप अपनी पसंद का टेम्पलेट सलेक्ट करे टेम्पलेट सलेक्ट करने के बाद Create Blog पर क्लीक कर दे.
new blog view
new blog view
Create Blog पर क्लीक करते ही आपके सामने आपका new ब्लॉग बन कर आ जायेगा जेसा आपको ऊपर चित्र में दिखाई दे रहा है इसमें सबसे ऊपर आपको View Blog लिखा दिखाई देगा आप उस पर क्लीक करके अपने ब्लॉग को देख सकते है.
लेफ्ट साईट में आपको New Post लिखा दिखाई देगा जिस पर क्लीक करके आप new पोस्ट कर सकते जो मैंने आप आपको ब्लॉग बनाने की जानकरी दी है ये तो केवल शुरुवात है ब्लॉग की आगे की पोस्टो में मैं आपको और भी जानकरी दूंगा जेसे की ब्लॉग के अन्दर पोस्ट किस तरह की जाती है ब्लॉग में पेज किस तरह बनाये जाते है ब्लॉग का टेम्पलेट किस तरह बदला जाता है ये सभी जानकारी आपको मेरी आने वाली पोस्टो में मिलेगी अगर आपको ब्लॉग से जुडी और भी जानकारी चाहिए तो आप मेरे ब्लॉग पर जाकर इस से जुडी और भी जानकारी देख सकते है मेरे ब्लॉग पर जाने के लिए यहाँ क्लीक करे

इमेल आईडी बनाना

वेसे इमेल आईडी बनाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है लेकिन अक्सर देखा गया है जिन लोगो को ईमेल आईडी बनाना नहीं आता वो लोग अक्सर किसी से भी अपनी ईमेल आईडी बनवा लेते है ऐसा करना बिलकुल भी सही नहीं है ऐसा करने से आपकी आईडी और आपकी आईडी से जुडी पर्सनल जानकरी बिलकुल भी सेफ नहीं है मेरी सलाह तो यह ही है की जब भी आपको या आपके किसी फेमली मेंबर की ईमेल आईडी बनानी पड़े तो आप इस काम को खुद ही करे किसी ऐसे अजनबी इंसान से ना करवाए जिसे आप जानते भी नहीं हो आज की पोस्ट के द्वारा में आपको Gmail id create account की जानकरी स्टेप बाय स्टेप हिंदी में दूंगा
मैं आज की पोस्ट के द्वारा जिस आईडी के बारे में जानकरी देने वाला हु वो जानकरी जीमेल आईडी की है अब आप यह सोच रहे होंगे की मेल आपको Gmail आईडी के बारे में ही क्यों बता रहा हु इंटरनेट की दुनिया में और भी बहुत सी कम्पनी है जो ईमेल आईडी बनाने की सुविधा देती है तो मेल आपको बताना चाहूँगा इन्टरनेट की दुनिया में सबसे ज्यादा जो ईमेल आईडी चलती है वो gmail की ही ईमेल आईडी है आजकल जो भी स्मार्ट फोन आ रहे है उनके लिए भी gmail आईडी की ही जरूरत पडती है
Gmail id create account करने से पहले मैं आपको बताना चाहूँगा की आप अपनी इस gmail आईडी से क्या क्या कर सकते हो
  1. gmail आईडी का इस्तेमाल आप अपने पर्सनल डॉक्यूमेंट में कर सकते हो
  2. इस आईडी का इस्तेमाल आप अपने आधार कार्ड, पेन कार्ड, आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि में कर सकते हो
  3. g mail आईडी का इस्तेमाल आप अपने स्मार्ट फोन में कर सकते हो
  4. इस जीमेल आईडी से आप अपना खुद का ब्लॉग बना सकते हो
  5. इसी आईडी के द्वारा आप अपना you tube चैनल बना सकते हो
  6. इस आईडी का इस्तेमाल आप फेसबुक पेज बनाने में भी कर सकते हो
  7. अगर आपको इन्टरनेट की दुनिया से पैसा कमाना है तो वो काम भी आप इसी ईमेल आईडी के द्वारा कर सकते हो
मेरी जो लास्ट वाली लाइन है जिसमे मैंने बोला है की आप इस आईडी के द्वारा पैसा भी कम सकते हो यह मैंने इसलिए बोला है क्युकी आप सच में इन्टरनेट से पसा कम सकते हो बस आपके पास एक जीमेल आईडी होनी चाहिए अपनी इस वेबसाइट में आने वाले टाइम में मैं आपको इसी टोपिक पर पोस्ट करूँगा जिसमे मैं आपको बताऊंगा की आप किस तरह बहुत ही आराम से इन्टरनेट से पैसा कम सकते हो यह मेरी वेबसाइट की शुरुवात है इसलिए में आपको स्टार्टिंग से सब कुछ स्टेप बाय स्टेप बता रहा हु ताकि जो मैं आगे पोस्ट लिखू वो आप सभी के काम आ सके और ये काम तब होगा जब आपके पास अपनी खुद की जीमेल आईडी होगी
जीमेल आईडी बनाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है आप बहुत ही आराम से जीमेल आईडी बना सकते हो अगर आप खुद अपनी जीमेल आईडी बनाओगे तो आपके खुद के अन्दर एक विस्वास जागेगा तब ही आप इंटरनेट की दुनिया में जीत हासिल कर सकते हो
तो आइये शुरू करते है Gmail id create account Step by Step in Hindi
अगर आप अपनी खुद की जीमेल आईडी बनाना चाहते हो तो आपको गमेल के होम पेज पर जाना होगा जिसके लिए आपको इस लिंक पर क्लीक करना होगा
होम पेज पर आने के बाद आपको निचे एक Create account कब्तन दिखाई देगा आपको उस पर क्लीक करना है या आप चाहे तो इस लिंक पर क्लीक करके भी आप Gmail id create account पेज पर जा सकते है
अब आपके सामने एक एज खुलेगा जिसमे आपको अपनी सभी जानकरी स्टेप बाय स्टेप भरनी है जेसे की आपका पूरा नाम, आपकी पसंद का वो यूजर नेक जो आपको अपनी जीमेल आईडी पर चाहिए जेसे की मेरा है fastgyan, यूजर नेम के निचे आपका पासवर्ड, आपकी डेट ऑफ़ बर्थ, आपका मोबाइल नम्बर, आपका देश ये सभी जानकरी सही सही भरने के बाद आपको सबसे निचे Next Step पर क्लीक करना है फिर एक कॉड आपके उस नम्बर पर आएगा जी नम्बर आपने जीमेल आईडी के फॉर्म में ऐड किया है वो कॉड डालने के बाद सबमिट पर क्लीक करते ही आपकी खुद की एक ईमेल आईडी बन जाएगी जिसका इस्तेमाल आप कही भी कर सकते है

शालेय पोषण आहार कॅल्क्युलेटर 2.1 ( MDM Calculator 2.1)

                                             
वैशिष्टे 
1) आता अगदी नव्या रूपात..
2) totally customisable.. एका बटनावर सर्व जवळ जवळ ५०+ घटक बदलून सेव करता येतात.
3) प्रमाण | पूरक आहार नियोजन | पाककृती या तिन्ही बाबी बदलण्याची व सेव करण्याची सुविधा.
4) हे App बंद केल्यानंतर पुन्हा सुरु केल्यावर आपण केलेले बदल अपोआप लोड होतात.
5) गणक यंत्रातील पदार्थ/डाळी/खर्च सारखे मेनू वाढवण्याची किंवा कमी करण्याची खास सोय.
6) होम स्क्रीन वर तुमचे/शाळेचे नाव लिहू शकता. ते सेव करू शकता.
7) वापरण्यास पहिल्यापेक्षा सुलभ / युजर फ्रेंडली.                      
8) कसे वापरावे याची पूर्ण माहिती.

Friday, 13 January 2017

शाळेत फ्लेक्स बोर्ड लावणे संबंधी

शिक्षण हक्क कायद्याची प्रभावी अंमलबजावणी होण्याच्या दृष्टीने शिक्षण हक्क कायद्याची माहिती जनसामान्यांपर्यंत पोहचावी त्याचप्रमाणे शिक्षण हक्क कायद्यातील तरतुदींची ओळख व्हावी या हेतूने मा.अप्पर मुख्य सचिव, शालेय  शिक्षण व क्रीडा विभाग, मंत्रालय, मुंबई यांच्या सूचनेनुसार सर्व प्राथमिक शाळांमध्ये सोबत दिलेल्या मजकुराचा वापर करून ४ फ्लेक्स बोर्ड तयार करण्यात यावेत व शाळेच्या दर्शनी भागावर सर्व पालकांना व शाळेत येणा-या विद्यार्थ्यांना दिसेल अशा जागी प्रदर्शित करण्यात यावेत.यासाठी येणारा खर्च प्रत्येक शाळेने त्यांच्याकडे असलेल्या शाळा अनुदानातून करावा.

  • प्रत्येक फ्लेक्स बोर्ड साठी रु.१५०/- याप्रमाणे ४ फ्लेक्स बोर्डचा खर्च रु. ६००/- एवढा करावा.
  • फ्लेक्स बोर्डचा आकार ४ X ३ फुट असावा.
  • फ्लेक्स बोर्ड आकर्षित व रंगीत असावेत.
राष्ट्रध्वजभारतीय राष्ट्रध्वज२२ जुलै १९४७ रोजी, भारत देशाला स्वातंत्र्य मिळण्याच्या २४ दिवस आधी, अंगिकारला गेला. भारतीय राष्ट्रध्वजात गडदभगवा,पांढरावहिरवाह्या तीन रंगांचे आडवे पट्टे आहेत ज्यामुळे त्याला पुष्कळदातिरंगाअसेही संबोधले जाते. मछलीपट्टणम जवळ जन्मलेल्या पिंगली वेंकय्या ह्यांनी तिरंग्याची रचना केली आहे.भारतीय राष्ट्रध्वजाच्यालांबी व उंचीचे प्रमाण३:२असेआहे, तसेच राष्ट्रध्वज खादीच्या अथवा रेशमाच्या कापडाचाच बनवला जावा असा सरकारी नियम आहे.रचनापिंगली वेंकय्या ह्यांनी रचलेल्या भारतीय राष्ट्रध्वजात गडद भगवा, पांढरा व हिरवा हे तीन रंग आहेत. पांढऱ्या रंगाच्या पट्ट्याच्या मधोमध निळ्या रंगाचे अशोक चक्र आहे.रंगभावनागडद भगवात्यागपांढराशांतीहिरवासमृद्धीनिळाचोविस तासभारताचा राष्ट्रीय ध्वजात चार रंगाचा वापर केला गेला आहे. केशरी,पांढरा,हिरवा,आणि निळा.(खरे पाहता आपला राष्ट्रीय राष्ट्रीय ध्वज, रंगाचाच विचार केला तर तिरंगा नसून चौरंगा आहे).२२ जुलै १९४७ रोजी घटना समितीच्या बैठकीत'तिरंगी ध्वज'भारताचा अधिकृत राष्ट्रीजय ध्वज म्हणून स्वीकृत करण्यात आला.त्या संबंधीचा ठराव पंडित जवाहरलाल नेहरू यांनी मांडला.एकाला एक लागून असलेल्या आडव्या समान प्रमाणाच्या तीन पट्ट्यांचा तो आहे. वरती गर्द केशरी, मध्यभागी पांढरा आणि खालच्या बाजूला गर्द हिरवा, अशा क्रमाने हे तीन रंग आहेत. मधल्या पांढऱ्या पट्ट्यावर निळ्या रंगाचे धम्मचक्र असून ते सारनाथ येथे आढळलेल्या सिंहमुद्रेवर असलेल्या अशोकचक्रासारखे हे. चक्राला २४ आरे आहेत. डॉ. एस्. राधाकृष्णन्यांनी भारतीय राष्ट्रध्वजाच्या एकूण रचनेचे महत्त्व चांगल्या प्रकारे विशद केले आहेध्वजात तीन समान आडव्या पट्ट्यांची रचना करण्याकत आली आहे.- वरच्या भागात गडद केशरी रंग आहे.या रंगातून त्याग, धैर्य याचा बोध होतो.- मधल्या भागात पांढरा रंग आहे.या रंगातून प्रकाशाचा आणि सत्यमार्गाचा शांती, सत्य, व पावित्र्याचा बोध होतो.- खालील भागात गडद हिरवा रंग आहे. हा रंगातून निसर्गाशी वा भूमीशी असलेले नाते दर्शवितो, निष्ठा व समृध्दीचा बोध होतो.- निळ्या रंगाचे अशोक चक्र हे सागराप्रमाणे अथांगता व कालचक्राच व त्यासोबत बदलत जाणा-या जगाचं सूचन करतो.जीवनगतिमान असावे व भारतीयांनी शांततापूर्णतेने आगेकूच करावी असे धम्मचक्र दर्शविते. मूलतः हे चक्र विश्वशांतीचा संदेश देणाऱ्या बौद्ध धर्माचे धम्मचक्र आहे. त्याला‘अशोकचक्र'या नावाने ओळखले जाते.त्यात भारतीय कला, तत्त्वज्ञान, इतिहास व संस्कृती यांचा सुरेख संगम झालेला दिसतो. ‘धम्मचक्र प्रवर्तनाय' हे घोषवाक्य भारतीय संसदसभापतीच्या स्थानाच्या शिरोभागी लिहिलेले आहेराष्ट्रध्वज फडकवण्याची नियमावलीदेशाच्या अस्मितेचे प्रतीक असलेला राष्ट्रध्वज तिरंगा राष्ट्रीय सण व अन्य महत्त्वपूर्ण दिवशी सन्मानपूर्वक फडकवला जातो. राष्ट्राचे प्रतीक असलेल्या राष्ट्रध्वजाला फडकावित असताना त्याचा कुठल्याही प्रकारे अवमान होणार नाही, यासाठी काही नियम करण्यात आले आहेत. केंद्रीय गृह मंत्रालयाच्या वतीने भारतीय राष्ट्रध्वज संहिता तयार करण्यात आली आहे. ध्वज संहितेबाबत नागरिकांमध्ये जागृती निर्माण व्हावी, अशी अपेक्षा व्यक्त करण्यात आली आहे.*.राष्ट्रीय ध्वजाबाबत संहिता तयार करण्यात आल्याचे खूप कमी नागरिकांना माहिती असते. संहितेनुसार महत्त्वाचे राष्ट्रीय कार्यक्रम, सांस्कृतिक व मैदानी खेळाच्या वेळी नागरिक कागदाचा झेंडा हातात घेऊन फडकवताना दिसतात. मात्र, कार्यक्रम झाल्यानंतर तेच झेंडे जमिनीवर इतरत्र फेकलेले दिसतात. ते टाळले पाहिजे. प्लॅस्टिकपासून तयार करण्यात आलेल्या झेंड्यांचा उपयोग करू नये.*.ध्वज संहितांनुसार जेव्हा राष्ट्रीय ध्वज फडकविला जातो तेव्हा त्याला सन्मानपूर्वक उच्च स्थान दिले पाहिजे. राष्ट्रीय ध्वज अशा जागेवर फडकवला पाहिजे की, तो सगळ्यांना दिसला पाहिजे. शासकीय इमारतीवर राष्ट्रध्वज फडकवण्याचा प्रथा आहे. रविवार व अन्य सुटीच्या दिवशीही सूर्योदयापासून ते सूर्यास्तापर्यंत ध्वज फडकवला गेलाच पाहिजे. प्रतिकूल हवामानातही ध्वज फडकवणे आवश्यक आहे.*.संहितेनुसार राष्ट्रध्वज नेहमी स्फूर्तीने फडकवला पाहिजे व आदरपूर्वक ध्वज हळूहळू उतरवला गेला पाहिजे. ध्वज फडकवताना व उतरवताना बिगूल वाजविलाच पाहिजे. ध्वज कुठल्याही इमारतीच्या खिडकी, बाल्कनी अथवा दर्शनी भागात आडवा व तिरपा फडकवताना ध्वजातील केशरी रंगांचा पट्टा हा वरच्या बाजूला हवा.*.राष्ट्रध्वज सभेच्या वेळी फडकविताना अशा पद्धतीने फडकाविला गेला पाहिजे की, मान्यवराचे तोंड हे उपस्थिताकडे पाहिजे व ध्वज हा त्यांच्या डाव्या बाजूला पाहिजे. अथवा ध्वज भिंतीवर असेल तर मान्यवरांच्या मागे व भिंतीवर आडवा फडकाविला पाहिजे. कुठल्या पुतळ्याचे अनावरण असेल तर ध्वज सन्मानपूर्वकव वेगळ्या पद्धतीने फडकविला गेला पाहिजे. ध्वज गाडीवरलावताना गाडीच्या बॉनेटवर एक दंड उभा करावा व त्यावर फडकवावा.*.संहितेनुसार राष्ट्रीय ध्वज कुठल्या मिरवणूक किंवा परेडच्या व्यक्तीच्या उजव्या हातात ध्वज असावा. जर इतरही ध्वज असतील तर त्यांच्या मध्यभागी राष्ट्रध्वजअसला पाहिजे. फाटलेला, मळलेला ध्वज फडकविला जाता कामा नये. कोणत्या व्यक्तीला अथवा वस्तूला वंदन करताना ध्वज जमिनीच्या दिशेने झुकवू नये. इतर ध्वजांची पताकाअथवा ध्वज राष्ट्रध्वजापेक्षा उंच लावू नये.*.राष्ट्रध्वजाचा उपयोग वक्त्याचे व्यासपीठ झाकण्यासाठी अथवा ते सजविण्यासाठी करू नये. केशरी पट्टा जमिनीच्या बाजूने ठेवून ध्वज फडकविला जाऊ नये. तसेच राष्ट्रध्वजाला माती व पाण्याचा स्पर्श होऊ देऊ नये. ध्वज फडकविताना तो फाटणार नाही, अशा पद्धतीने बांधला पाहिजे.ध्वजाचा दुरुपयोग थांबविण्यासंदर्भातस्पष्ट दिशा ठरविण्यात आली आहे. त्यानुसार राजकीय व्यक्ती, केंद्रीय सैनिक दलाच्या संबंधित व्यक्तीच्या अंत्ययात्रेव्यतिरिक्त इतरत्र कोठेही त्याचा उपयोग करू नये. ध्वज कुठलेही वाहन, रेल्वे, जहाजावर लावला जाऊ शकत नाही.*.ध्वजाचा उपयोग घराच्या पडद्यासाठी करू नये. कुठलाही पेहराव करताना ध्वजाचे कापड घेता येणार नाही. तसेच राष्ट्रध्वज गादी, रुमाल अथवा नॅपकीनवर काढू नये. राष्ट्रध्वजावर कुठेलीही लिखाण केले जात नाही किंवा त्यावर कुठलीही जाहिरात केली जात नाही. ध्वज ज्या खांबावर फडकविला जातो त्यावरही जाहिरात लावता येणार नाही.*.केवळ प्रजासत्ताक दिन व स्वातंत्र्य दिन याच दिवशी ध्वज फुलांच्या पाकळ्या ठेवून फडकविला जातो. राष्ट्रीय ध्वज फडकवताना अथवा उतरवताना उपस्थित नागरिक कवायतीच्या सावधान स्थितीत पाहिजेत. शासकीय पोषाखात असलेले सरकारी अधिकारी ध्वजाला मानवंदना देतील. जेव्हा ध्वज सैन्याच्या तुकडीतील जवानाच्या हातात असेल व तो सावधान स्थितीत उभा राहिल. सरकारी अधिकार्यां च्या जवळून ध्वज जात असताना त्यांनी ध्वजाला सन्मानपूर्वक मानवंदना दिली पाहिजे. आदरणीय व्यक्ती डोक्यावर टोपी न घालताही राष्ट्रध्वजाला मानवंदना देऊ शकतात.
महापर्व महाचर्चेचे ♦
दि. 15/07/2015 
वार. बुधवार 
वेळ - सायंकाळी ८ ते १० 
💠विषय - पायाभूत चाचणी आवश्यकता, उपयुक्तता, ध्येय धोरणे व अंमलबजावणी.
⭕वयोगटानुसार व इयत्ता  निहाय क्षमता प्राप्त झाल्या आहेत का हे तपासणे हा उद्देश.
ध्येय - वयोगटानुसार व इयत्ता  निहाय किमान क्षमता प्राप्त करण्यासाठी काय ?कसे? प्रयत्न करावेत या साठी नियोजन करण्यास मदत.
⭕पायाभूत चाचणी उदेश्य... किमान क्षमता प्राप्ती तपासणे व त्या अनुषंगाने पाठपुरावा करणे.
प्रत्येक विषयासाठी मूळात ज्या आवश्यक आहेत अशा क्षमतांची तपासणी म्हणजे पायाभूत चाचणी.
⭕पुढील वर्ग क्षमता प्राप्त करण्यासाठी आधिच्या वर्गातील पाया कसा आहे हे तपासणीसाठी पायाभूत चाचणी हा उद्देश.
⭕२ री चा विद्यार्थी १ ली तून आला म्हणून त्याच्या १ ली तिल आवश्यक क्षमता  तपासणे असेच ना.
⭕किमान क्षमता प्राप्ती तपासणे गरजेचे आहेच पाठपुरावा करण्यासाठी.
विद्यार्थ्यांच्या गुणवत्ता वाढीसाठी हा प्रयत्न आहे.
⭕विद्यार्थ्यांना शैक्षणिक दृष्टीने समृद्ध करण्यासाठी, 
मुलांना काय येते, कोठे मदतीची गरज आहे ते शोधण्यासाठी, मुलांची समज, कौशल्ये, विचारक्षमता तपासणे हे
या पायाभूत चाचण्यांचे उद्देश आहेत.
⭕पायाभुत चाचणी मुळे आपणास पुढील सकारात्मक दिशा मिळू शकते..
CCE मुळे किमान क्षमता विद्यार्थी प्राप्त करतो कि नाही  यात शासन आता गोंधळून गेले आहे.
apk पायाभूत चाचणी शासनाने नाही ठरविले सर.. ती तर पुर्वी पासुनच आहे... आपल्या ला डी एड ला देखिल होती अभ्यासक्रमात.
⭕विद्यार्थी कुठे मागे आहे त्याचा शोध घेणे व त्यावर उपाययोजना करणे .हा भाग आपल्या अध्ययन अध्यापनातीलच भाग आहे .
⭕जर आपले शैक्षणिक कार्य चांगले असेल ..विद्यार्थी प्रगती योग्य दिशेने होत असल्यास आपल्याला कोणत्याही चाचणीला विरोध करण्याची गरज नाही..
मला वाटते सातत्यपुर्ण सर्वंकष मूल्यमापन ही संकल्पना आपल्याला मुळात कळालीच नाही..
⭕Accoding to Rte student must attain required level and give academic support as per his requirement...its our duty.
⭕CCE मूल्यमापन पद्धती चुकीची जरी नसली तरी ती अपेक्षित पद्धतीने राबविलि जाते का हा संशोधनाचा विषय ठरेल, 
CCE चा अर्थ अनेक बांधवांनी आपल्या सोईचा लावल्यानेच पायाभूत चाचणी घेण्याची वेळ आलीय.
⭕आपल्यापैकी किती जण तोंडी परीक्षा, कला कार्यानुभव, शाशि या विषयांच्या परीक्षा शास्त्रीय पद्धतीने घेतात.
CCE तशी खुप प्रभावी आहे.. अंमलबजावणी मध्ये आपण कमी पडतोय.
⭕खर तर आपण वर्ग जेव्हा जून महिन्यात घेतो तेव्हाच आपण प्रत्येकजण पायाभूत चाचणी घेतोचं..
⭕पायाभुतचाचणीही जर प्रामाणिकपणे घेतल्या गेली तरच खरे स्वरुप कळेल..
⭕हसत खेळत आपले मुल आज नेमके कुठे आहे हे आपल्याला पायाभूत मध्ये नेमके पाहयचे आहे.
⭕पायाभुत  चाचणी आवश्यक आहे कारण त्यामुळे विद्यार्थ्यांची क्षमता व आपणास करावयाचे बदल लक्षात येईल त्यानुसार बदल करुन अध्यापन करता येईल.
⭕मागील इयत्तांच्या मुलभुत अध्ययन क्षमतांवर प्रभुत्व संपादन केले आहे का? याची चाचपणी म्हणजे पायाभुत चाचणी.
⭕पायाभुत चाचणीमधुन पुढील शिक्षणाचा व शैक्षणिक गुणवत्तेचा पाया भक्कम आहे का ठरतो व पुढील दिशा ठरवता येते.
  ⭕एकदा आपल्या मुलाचा स्तर समजला की आपण त्यावर आपले पुढील नियोजन करु शकतो.
⭕पायाभुत चाचणीमुळे प्रभावी व परिणामकारक आयोजनासाठी  शिक्षकांना मार्गदर्शन मिळते आपले मुल नेमके कुठे आहे कळते.
⭕पायाभुत चाचणी योग्य व आत्यावश्यक .
पण शासन म्हणते करा म्हणून नको तर योग्य रीतीने राबवली जावी
निश्चित परीणाम दिसतील.
⭕मुलभुत अध्ययन क्षमतांचा विकास व जीवनकौशल्यांचे संपादन या दृष्टीने मागील इयत्तांची उजळणी अपरिहार्य ठरते.
⭕पायाभूत चाचणी जून मध्येच घ्यायला हवी.. असे वाटते..
मुल्यमापन पध्दती खुप चांगलीहोती.आहे..पण नोंदी वर्षी अखेर आठवड्यात पूर्ण करतात काही ठिकाणी.
ह्या आपल्या चुका आहेत.
तसे ईथे फक्त कागदी घोडे नाचु नयेत म्हणजे झालं.
⭕कागद नको.. मूलं पहावीत.. मग कोणतीही चाचणी असो..
मित्रांनो पायाभूत चाचणी आवश्यक आहे 
कारण. ...
अशा अनेक शाळा मिळतील 
जेथे दुसर्‍या वर्गातील मुलाला 
नाव लिहायला येत नाही 
अनेक मुलांना साधे शब्द 
लिहिता येत नाहीत.
⭕पायाभूत चाचणी प्रत्येक महिन्याच्या शेवटी असायला हवी.
पायाभूत चाचणी वर्षाच्या सुरवातीसचं असते.. त्यानंतर मूल कुठे मागे पडते हे आपले आपण तपासावे.. तिलाचं नैदानिक चाचणी म्हणतात.
⭕मागील इयत्तांमधील निश्चित केलेल्या सर्व मुलभुत अध्ययन क्षमतांचा प्रभुत्वपातळीपर्यंत विकास झाला तर कोणीही घेवो चाचणी घाबरायचे कारण नाही पण शाळेवर काम करुच द्यायचे नाही आणि चाचणी घेवुन विषयानुसार दर्जा किती खालावला म्हणुन मराठी व शासनाच्या शाळांना बदनाम करुन स्वतःच्या खाजगी शाळांची भर्ती वाढविण्याची कुटनीती वाटते.
⭕पहिला कार्यक्रम योग्य रीतीने राबत नाही आसे शासन ला निदर्शनास आले आसेल.म्हणून दुसरा कार्यक्रम असेल.
⭕पायाभूत चाचणी ही शिक्षा न समजता तिला दिशा दर्शक मानावे..
⭕चाचणी से डर नही लगता साहब।
लेने के तरिके से लगता है...
⭕शाळा सुरुवात होतांना वर्गाच सद्यस्थिती(status report) काय आहे हे पायाभूतचाचणीने समजेल .
⭕ईथुन पुढे आपला १ली चा वर्ग घेणे.त्याला continue किमान चौथी पर्यत नेणे.
मुले आपन ४वर्षात १ नं बनवु शकतो.
मग कुठलीही चाचणी येऊ द्या .
घाबरायचे कारण नाही.
कमी शिक्षक संख्या मुळे वर्ग बदल होत जातात.कदाचित व्दि शिक्षकी होतात म्हणून गुणवत्ते वर फरक दिसतो.
⭕शिक्षकांनी स्वतः स्वतःच्या वर्गाची विद्यार्थ्यांची पातळी निश्चित करणेसाठी घेतलेली चाचणी हवी इतरांमार्फत घेणे म्हणजे आपणांवर अविश्वास व त्यातुन फक्त बदनामी करणे हेतु आपण मुलांची वारंवारिता काढुन नियोजन आखणे गरजेचे जगाला कशाला कळावे पायाभुत चाचणी शिक्षकांस दिशादर्शक हवी.
⭕काही विध्यार्थीच गतिमंद  असतील तर शिक्षक तरी काय करणार.
⭕चाचणी नंतर समान बौधीक पातळीच्या मुलांचे गट तयार करून त्यांच्या क्षमता नुसार अध्यापन करता येते.
⭕विसरने हा मुलाचा स्वाभाविक स्वभाव आहे त्यामुळे प्रत्येक वेळी आपली मुल ही आपल्याला साथ देतील च असे नाही तेव्हा डगमगा याचे नाही आपले काम करत राहायचे.
द्विशिक्षकी शाळांचे प्रश्न किती मोठे आहेत कशी साधणार गुणवत्ता जर एक शिक्षक बाहेरच्या कामास जुंपत रहाल तर.
⭕कर्तव्य निष्ठा हवी.. कशात आपण कमी पडतोय हेही समजणे तितकेच महत्वाचे.
⭕प्रयोग आणि प्रयोग यामुळे तर आपली गुणवत्तेत व मानसिकतेत फरक पडत तर नाही ना?
⭕सर्व विकसित राष्ट्रांनी अगदी फिनलंड जगात शिक्षणात १नंबर राष्ट्राने स्विकारली आहे सर्व जगात सर्वमान्य आहे.मग विरोध करणेत अर्थ नाही cceला .राबविण्यात कमतरता आहे.
⭕पायाभूत चाचणी चा पाठपुरावा..
⭕ मुलांच्या कोणत्या क्षमता विकसित नाहीत त्यावर भर देता येईल.
⭕चाचणी नंतर अप्राप्त क्षमता नुसार गट करून कमतरता दूर करण्याचा प्रयत्न केला जावा .
कधी ,कसे ,इट्स depend on our teaching skill.
⭕अध्ययन कार्ड स्वतः आवश्यकते नुसार तयार करून वापर केल्यास वेळ वाचतो.
गोष्टींची पुस्तके वर्तमान  पत्रांचा वापर e learning शाब्दिक पट्या.
⭕गटपद्धती सर्वात उत्तम..
परिणामकारक मोजके उपक्रम व खेळ उदिष्टानुसार निवडणे .
I used laminated फ्लश कार्ड्स फॉर इट.
⭕Audio visual aids and group discussion is the best way.
⭕भाषिक खेळ घेता येतील.
क्षमता विचार करून अध्यापन साहित्य तयार करावे.
E learning चा पण वापर करता येईल.
विविध apps वापरता येणं शक्य.
⭕ई.लर्निंग तर सर्वच दुखण्यावरिल रामबाण इलाज आहे.
⭕कृतीयुक्त अध्ययन पद्धतीचा प्रभावी वापर केला तर उत्तम.
मुलांना बेरीज वजाबाकी गुणाकार भागाकार संख्या वाचन लेखन 
शब्द वाक्य वाचन लेखन मराठी व इंग्रजी या साठी जे काही कल्पक्तेने करता येईल ते करतच रहावे .
⭕आज मार्केट मध्ये खुप छान apps उपलब्ध आहेत... त्यांचा वापर व्हावा.
जे वर्गात विशेष मागे असतात त्या मुलास एक हुशार पण सराव घेवू शकणारा जोडीदार द्यावा.. 
उरलेल्या मुलांचे संमिश्र पद्धत.
⭕कृतियुक्त शिक्षण + è learning   असे स्वरुप असावे.
⭕हे सर्व करतांना तुला हे येत नाही असे म्हणण्यापेक्षा तुला येईल.. येत आहे बघ.. असा मुलांना आत्मविश्वास देत रहावा लागतो.. हे आवश्यक..
कार्ड तयार करण्यासाठी पालकांचीही मदत घेता येते.. सुंदरतेपेक्षा उपयुक्ततेला अधिक महत्व..
⭕आनंददायी शिक्षण चिरस्थायी ठरते भीतीचे शिक्षण क् अनुपस्थित मुलेच विशेष करून मागे पडतात.
⭕पुरक वाचन हवेच.
मठ्ठाना  शाळेत लवकर बोलावतात म्हणून ही मुले शाळेतचं येत नाहीत..
⭕सर्वजण एका स्तरावर येतील 
ही कल्पना शिक्षणतद्न्याना कशी काय सुचली असेल 
मुलांच्या उपजत बुद्धी 
घरचे वातावरण
याचा पन विचार व्हावा.
⭕कोणाला चांगले येते ते शोधा.
मुलांसाठी....बालवाडी अॅप.
गटप्रमुख नेमा.. सराव कसा घ्यावा हे त्या चांगल्या मुलांना समजवा.. तुम्ही सतत आढावा घेत रहा.. तुम्ही त्यांच्या सोबत आहात ही जाणिव त्याच्यात पेरा..
⭕Abl पेक्षा e learning effective
आणि new genration like this mostly. 
Projector बरेच  काम कमी करतो.
⭕दोन्ही ही प्रभावी... आपल्या वर अवलंबून आहे.
मुलांना आनंद कशात मिळू शकेल किंवा मिळतो हे शोधणे महत्वाचे.
आनंदातुन शिक्षण प्रभावी व चिरकाल टिकणारे होईल.
⭕ठीक आहे मिञांनो. 
चर्चा सञाला पुर्ण विराम देऊया... चर्चा सञात सर्वांनी भरभरून प्रतिसाद दिला सर्वांचे मनापासून आभार 🙏🙏

EDUCATION WITHOUT ETHICS IS A DISASTER


काल परवा पार पडलेल्या राज्यसेवा मुख्य परीक्षेत इंग्रजी विषयाच्या निबंधासाठी विषय होता POLITICS WITHOUT ETHICS IS A DISASTER.सहजच विचार करताना लक्षात आले , अरे किती live विषय आहे? विषयात फक्त राजकारणाचा विचार असला तरी आज प्रत्येक क्षेत्राची विश्वासार्हता ढासळलेली आढळते? राजकारणच का? बाकीचे सगळेच अंग अपंग झालेत समाजाचे.
समाजाचे नैतिक अध:पतन तसे सगळ्याच काळामध्ये होत होते नाही असे नाही. पण आजच्या नेटकरयांच्या युगात त्याची गती भयंकर म्हणावी अशी आहे.cut,edit,paste & share ची संस्कृती उदयाला आलीय. आणि ही वृत्ती अभ्यास आणि व्यासंग या वृत्तींचा खून करू पाहतेय.एखाद्या गोष्टीची सत्यासत्यता पडताळून पाहण्या ऐवजी जे समोर येतंय त्यावर विश्वास ठेवून डोक्यात राख घालून घेण्याची वृत्ती आजकाल भयंकरच म्हणावी लागेल.उदा.मागे स्वातंत्र्यदिनाच्या निमित्ताने एक संदेश whtsapp वर फार फिरत होता.मलाच किमान तो २० वेळा आला.त्यात असे म्हटले होते कि सगळ्या देश्यांची देशी भाषेतील आणि इंग्रजीतील नवे समान आहेत,पण भारताचे इंग्रजीत इंडिया आणि हिन्दूस्थानीमध्ये भारत. यामध्ये इंग्रजांचे कारस्थान आहे.INDIA-Indipendant Nations Declared In August अशी या नावाची व्युत्पत्ती सांगण्यात आली. आमच्या सर्व बांधवांनी अगदी उदारपणे सगळीकडे शेअर करून स्वतःबरोबरच आपल्या देश्याच्या महान परंपरेचाही तेजोभंग करवून घेतला.एकाही महाभागाला वीस वर्षे शाळेत शिकलेला इतिहास आठवला नाही.आपल्या राज्याघटनेतील पहिलेच वाक्य India that is Bharat shall be union of states हे सुद्धा या महाशयांना माहित नसते.तरीही पोस्ट हिरीरीने पुढे पाठवतात . हा आमच्या नालायकपनाचा कळस म्हणावा लागेल.आम्ही आमची अभ्यासाची परंपरा आणि मुल्ये गहान टाकलीत याचे हे द्योतक म्हणावे लागेल.
याला कारण आजची शिक्षणव्यवस्था म्हणावी लागेल.आमचे एक मित्र एम.च्या वर्गाला इतिहास शिकवतात.सहज गप्पा मारताना शिक्षकांच्या व्यासंगाचा मुद्दा चर्चेला निघाला.सरांनी सांगितलेले वास्तव अत्यंत चीड आणणारे होते.ज्यांची आणि अकलेची आयुष्यात कधीच गाठ पडली नाही ते मोक्याच्या जागा अडवून बसलेत.प्राचार्य निराशावादी, पर्यवेक्षक नादान. अशी परीस्थिती. त्यांच्या पागारांचे आकडे आपले डोळे दीपवणारे असते.जे खरेच लायक आणि होतकरू असतात त्यांना लेकरासाठीच्या दुधाचे बिल देण्याची पंचाईत असते,कारण ते csb वर काम करतात. ३००० महिना,म्हणजे आपल्या शासनाच्या रोजगार हमी योजनेपेक्षा कमी मजुरी .  पात्रता नेट.,सेट,पी.एच.डी.,पगार कमी, नोकरीत कायम होण्याची हमी नाही .हमी नाही म्हणण्यापेक्षा कुवत नाही. कारण अगदीच खेड्यातील कॉलेजचा रेट पंचवीस लाखाच्या पुढेच आहे.ज्यांना भरपूर पगार त्यांची साधे वर्तमानपत्र वाचण्याची दानत नाही.एका इतिहासाच्या तथाकथित कलेक्टरपेक्षा जास्त पगार घेणाऱ्या प्राध्यापक महोदयांना मी विचारले,"सर,इतिहासात एम.ए.करतोय काही संदर्भ पुस्तकांची नावे सुचवा",तर त्यांचे उत्तर इतके भयानक होते कि जसे काही मूळ संदर्भ पुस्तके वाचणे म्हणजे गुन्हा वाटावा.त्यांच्या मते ते स्वतः बाजारू नोट्स वाचूनच प्राध्यापक झाले होते.इतःपर आम्हीही बाजारू नोट्स वाचूनच डिग्री मिळवावी आणि मिरवावी अशीच त्यांची शिकवण होती.अर्थात त्यांनी पानिपतचे युद्ध याविषयी जे हास्यास्पद ज्ञान दिले त्याचे मला मुळीच आश्चर्य वाटले नाही.
असे लोक काय आमच्या कलाम साहेबांच्या कल्पनेतील प्रज्वलित मने घडवणार?काय त्यांच्या स्वप्नातील भारत उभा करणार. २०२० सालात महासत्ता होण्याचे त्यांचे स्वप्न कसे पूर्ण करणार.विद्यार्थ्यांच्या बटव्यातून तंबाखूचा विडा उसना घेणारी जमात पूर्वीही होती पण आता अकल्पनीय प्रमाणात वाढलीय.
खरेतर स्वतः कालसुसंगत राहण्याचे फार मोठे आव्हान आमच्या या महामहीम गुरुवर्यांसमोर आहे.काळाच्या पुढे चालणारे शिक्षक आमच्या नशिबाने आपल्या देशात आहेतही पण १३० कोटींच्या देशासाठी तेवढे पुरेसे नाहीत.स्वतःची व्यावसायिकता जपणारी ध्येयवादी शिक्षकांची पिढी घडवणे खूप आवश्यक आहे. त्यासाठी सत्ताधारी, विरोधक,सामाजिक कार्यकर्ते यांनी आपापले मतभेद बाजूला ठेऊन एकत्र येणे आवश्यक आहे.अन्यथा मूल्याधिष्ठित शिक्षणव्यवस्था आपण कधीही उभी करू शकणार नाहीत. आम्हीच उभी केलेली मुल्यविहीन बाजाराधिष्ठित शिक्षणव्यवस्था हे आमचे सर्वात मोठे पाप आहे.त्याचे क्षालन आम्हीच करावयास हवे.आमच्या मातीचे दुर्दैव हे इथे मुल्यव्यवस्थेपेक्षा आर्थिक हितसंबंध कायम वरचढ ठरत आलेत.बाजारबसवी व्यवस्था दुसरे काय ?  

श्रीकृष्णविचार

श्रीकृष्ण जयंति विशेष कृष्णसंदेश

यद्यद्विभूतिमत्सत्वम् श्रीमदुर्जितमेव वा|
 तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंशसंभवम्  ॥10-41॥

अर्थ : विश्वात जेथे जेथे विभूतीमत्व, ऎश्वर्य, शक्ती,कांती पाहशील ती माझ्याच अंशाची अभिव्यक्ती आहे असे तु मान.

आजच्या भेगाळलेल्या समाजाला एकसंघ करण्याची ताकद श्रीकृष्णाच्या विचारात आहे.आमचं तेवढं खरं आणि इतर सर्व चूक म्हणणाऱ्या लोकांनी योगेश्वराचा हा संदेश ध्यानी घेणे अत्यंत आवश्यक आहे.

   हे ज्याच्या ध्यानात येईल तो कोणत्याही धर्माचा,जातीचा,वंशाचा,लिंगाचा,प्रदेशाचा,वर्णाचा,स्वप्नातही द्वेष करणे शक्य नाही.तोच खरा श्रीकृष्णभक्त.जो भेद मिटवतो तो भक्त; भेद उभे करणारा भक्त असू शकत नाही.

     जगाच्या सर्व समस्यांवर तार्किक उत्तर पुरवणार्या जगद्गुरु श्रीकृष्णाला आजच्या दिवशी कोटी कोटी वंदन.॥ कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥

   कृष्णाचा उपदेशच विश्वधर्माचा पाया बनू शकतो हे ध्यानात घेऊन " अवघाचि संसार सुखाचा करिन आनंदे भरिन तिन्ही लोक " अशी विश्व ऎक्य आणि विश्व सौख्याची कामना आणि प्रतिज्ञा करणाऱ्या कविश्रेष्ठ ज्ञानेश्वरांनाही जयंती निमित्त कोटी कोटी नमन
शिक्षणाचा खेळखंडोबा झालाय का?

शिक्षणाचा खेळखंडोबा झालाय का? या प्रश्नाचे उत्तर खेळखंडोबा झाला आहे. परंतु, काही अंशी बाकी आहे असे द्यावे लागेल. शिक्षणाची मोठी परंपरा आपल्याला लाभलेली आहे. परंतू आज जागतिकीकरणाच्या युगातच या शिक्षणाचा खेळखंडोबा का झाला? याची बरीच कारणे आहेत. परंतू नोकरी मिळविण्याचे साधन म्हणून शिक्षणाकडे पाहण्याची प्रवृत्ती वाढीस लागली हे महत्त्वाचे कारण सांगता येईल. अर्थात ते बऱ्यास अंशी योग्यही आहे. मग याचबरोबर येणारा नोकरभरतीतील भ्रष्टाचार, कारकुनी पद्धतीचे शिक्षण, अभ्यासक्रमातील दोष, संस्थाचालकांचा हस्तक्षेप आणि त्यामुळे शिक्षणाचे झालेले बाजारीकरण या बाबी खेळखंडोबा होण्यास कारणीभूत आहेत. या व्यतिरिक्तही अनेक कारणे सांगता येतील.
कोणत्याही क्षेत्रातील शिक्षण असो, आज जागतिकीकरणाच्या युगात शिक्षणाला बाजारू स्वरूप प्राप्त झालेले आहे. मूळात विद्यार्थ्यांना अध्यापन करणाऱ्या प्राध्यापकांवर आजच्या व्यवस्थेत मोठ्या प्रमाणात अन्याय होत आहे. त्यांच्यावर व्यवस्थेमुळे विविध बंधने येत आहेत, काहीवेळा आणली जात आहेत. विनाअनुदानित तत्त्वावर बरेच प्राध्यापक कित्येक वर्षे काम करत आहेत. परंतु संस्थाचालकांचा हस्तक्षेप आणि प्राचार्यांचा बुजगावणेपणा ,सरकारचे महाविद्यालयांतील विविध बाबींवर नसणारे नियंत्रण किंवा या दोहोंचे असणारे लागेबांधे यांमुळे विनाअनुदानित तत्त्वावरील या प्राध्यापकास न्याय मिळत नाही. उपाशी पोटी ज्ञान देणे आणि ज्ञान घेणे ह्या दोन्ही गोष्टी आजच्या काळात न केलेल्याच बऱ्या. अर्थात शिक्षणप्रणालीमध्ये यामुळे काय फरक पडत असेल हा संशोधनाचा मुद्दा आहे. कवी प्रभाकर लोंढे यांनी कवितेतून बिनपगारी शिक्षकांची व्यथा योग्य शब्दात मांडली आहे ते म्हणतात.
काय सांगू भाऊ आता
शिक्षकांची बिनपगारी व्यथा
फुकटामंदी दिवस चालले
खाता खाता लाथा....
शिक्षणाचा खेळखंडोबा होण्याचे दुसरे महत्त्वाचे कारण म्हणजे अभ्यासक्रम. पारंपरिकतेबरोबर नवता स्विकारायला आपली अभ्यासमंडळे का तयार होत नाहीत? हा सुद्धा आणखी संशोधनाचा मुद्दा आहे. काळानुरूप अभ्यासक्रम बदलायला हवेत जेणेकरून कोणताही विद्यार्थी काळाच्या ओघात राष्ट्रीय, आंतरराष्ट्रीय पातळीवर टिकू शकेल. अभ्यासमंडळांमध्ये अशा प्रकारचे गट आहेत जे स्वत:च्या ओळखीच्या फडतूस लेखकांच्या पुस्तकांचा अभ्यासक्रमामध्ये समावेश करतात. ही पद्धत रूढ झाल्यामुळे प्राध्यापकांना ती नाइलाजास्तव शिकवावी लागतात आणि विद्यार्थ्यांनाही सहन करावी लागतात. परिणामी विद्यार्थ्याचा सर्वागीण विकास होत नाही. एकच एक दृष्टिकोन तयार होतो. यावरही नियंत्रण असायला हवे. त्यामुळे विद्यार्थ्यांना परिपूर्ण शिक्षण देता येईल. मराठीसारख्या विषयामधून नोकरी, व्यवसायाच्या अनेक संधी उपलब्ध आहेत. उदा. पटकथालेखन, पत्रकारिता, मुद्रितशोधन, प्रकाशनव्यवसाय, सुत्रसंचालन, नियतकालिकांचे संपादन, भाषांतरकार इत्यादी. यासाठी योग्य मार्गदर्शन आणि अभ्यासक्रमाची गरज आहे, असे प्रत्येकच विषयात/क्षेत्रात योग्य अभ्यासक्रम तयार करायला हवेत.
शिक्षणातील खेळखंडोबा होण्यासाठी सर्वात जास्त कोणती गोष्ट कारणीभूत असेल तर, ती आहे नोकरभरतीतील भ्रष्टाचार. या वाढलेल्या भ्रष्टाचारामुळे विद्यार्थ्यांचा शिक्षणाकडे पाहण्याचा दृष्टिकोन दूषित झाला आहे. नोकरभरतीत पैशाची देवाण घेवाण केली जाते त्यामुळे गुणपत्ताधारक विद्यार्थ्याला डावलले जाते. अशा चांगल्या विद्यार्थ्याला डावलल्यामुळे विविध दोषांनी परीपूर्ण असलेले शिक्षण विद्यार्थ्यांना मिळते परिणामी त्यामधून विद्यार्थ्याचे शैक्षणिक नुकसान झाल्याचे पहावयास मिळते. सरकार विविध शिक्षणसंस्थांना भरभरून अनुदान देते परंतु ते विद्यार्थ्याच्या सर्वांगीण विकासासाठी वापरले जाते का? जे सरकार या शिक्षणासंस्थाना अनुदान देते, त्या सरकारच्या प्रत्यक्ष या संस्थांच्या कोणत्याही बाबींमध्ये हस्तक्षेप नसतो आणि यामधून भ्रष्टाचार वाढत आहे. याबाबत कडक कायदे करण्याची आवश्यकता आहे.
भारतावर इग्रंजानी तब्बल दिडशे वर्ष राज्य केले. आपल्या मधून कारकून निर्माण करण्याच्या दृष्टीने भारतीय शिक्षणाचा पाया घातला गेला. हे सर्वज्ञात आहेच. पण तीच शिक्षणपद्धती आज लागू केली जात असेल तर, हे आजच्या काळात तरी पटण्यासारखे नाही. मग असा प्रश्न निर्माण होतो की, आपण स्वातंत्र्यात आहोत की पारतंत्रात? आपण उदयाची नवी पिढी घडवतोय की कारकून? भारत महासत्ता कसा होईल हा तर फारच मोठा प्रश्न आहे. एकीकडे आपण मंगळापर्यंत मजल मारली परंतु दुसरीकडे आपल्याच देशात आपल्या उदयाच्या भावी पिढीमुळे काय प्रश्न आहेत. याच्याकडे आपण कधी पाहणार आहोत. आजच्या शिक्षणाचा खेळखंडोबा झालाच आहे. अपवादात्मक काही शिक्षण संस्था वगळता सर्रास संस्थाचालकाचा होणारा हस्तक्षेप, अभ्यासक्रमातील दोष, नोकरभरतीतील भ्रष्टाचार, कारकुनी पद्धतीचे शिक्षण, या सर्व बाबींमुळे आपली भावी पिढी काळाच्या ओघात टिकू शकेल की नाही हा मोठा प्रश्न आहे. आज देशभरात असंख्य ठिकाणी उच्चशिक्षण, तंत्रशिक्षण देणाऱ्या संस्था आहेत आणि त्यामध्ये दरवर्षी भर पडत आहे. आपल्या शिक्षणाचा हेतू काय आहे? हेच अजून बऱ्याच अंशी समजलेले दिसत नाही. आणि त्यामधून भविष्यकालीन ध्येयधोरणे निश्चित झालेली दिसत नाही. शिक्षणाचा हेतू विशिष्ट विषयातील ज्ञान संपादन करणे व त्याचा आपल्या दैनंदिन जीवनात उपयोग करून घेऊन समस्यांचे निराकरण करणे जीवन अधिक सुखी, सुरक्षीत, सुसह्य करणे हा आहे. ही गोष्ट आपल्या विस्मरणात गेली आहे. महात्मा फुले म्हणतात, 'विद्येविना मती गेली' परंतु आता विद्या असुनही गती गहाण ठेवली जात आहे किंवा गहाण ठेवण्यास भाग पाडले जात आहे असे दिसते.
आजच्या शिक्षणपद्धतीची साहित्याने त्याचबरोबर, चित्रपटाची दखल घेतली आहे. शिक्षणातील या अनिष्ठ रूढींवर भाष्य करण्याचा प्रयत्न केला आहे असे दिसते. उदा. निशाणी डावा अंगठा (चित्रपट कांदबरी), सैराट (चित्रपट), शिक्षणाचा आयचा घो! (चित्रपट), जोहार (कादंबरी) अशी अनेक उदाहरणे देता येतील. ही प्रातिनिधीक उदाहरणे आहेत. यांचा अभ्यास केला तरी शिक्षणाचा खेळखंडोबा का झालाय? आणि याला कोणत्या गोष्टी कारणीभूत आहेत, हे लक्षात येईल. अभ्यास आणि ध्यास या संकल्पना काळाच्या ओघात मागे पडलेल्या दिसतात. अर्थात् हे विधान सर्वांना लागू होत नाही. किंवा या लेखातील मांडणी सर्वांच्या बाबतीत लागू होत नाही त्याला अपवाद असू शकतो.
बऱ्याचदा असे लक्षात येते की, अलीकडील इंग्रजी माध्यमांमुळे सर्वजण इंग्रजीकडे आकर्षित झालेले आहे आणि त्याशिवाय पर्यायच नाही अशी धारणा निर्माण झालेली आहे. परंतु या देशातील असामान्य कार्य करणाऱ्या व्यक्तींची उदाहरणे घेतली तर आपल्या असे लक्षात येईल की, त्यांनी आपले शिक्षण मातृभाषेतून घेतले होते आणि जी गोष्ट मातृभाषेतून अधिक चांगल्या प्रकारे समजू शकते ती दुसऱ्या कोणत्याही भाषेतून समजू शकत नाही. अर्थात् दुसऱ्या भाषा आत्मसात करू नये असे म्हणणार नाही.
मोरोपंतानी एका आर्यामध्ये म्हटले आहे की,
विद्येनेच मनुष्य आले श्रेष्ठत्व या जगा माजी|
न दिसे एकही वस्तू विद्येनेही असाध्य आहे जी|
जर विद्येने मनुष्याला श्रेष्ठत्व येत आहे, जगातील सर्व गोष्टी तो पाहू शकतोय तर शिक्षणाचा हा खेळखंडोबा तो का पाहू शकत नाही हा प्रश्न आहे?